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ज्योतिष उपायों का संसार

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‘ज्योतिष’ उस ज्योति का नाम है जो जनता को रास्ता दिखा सके। किसी व्यक्ति को क्या रोग है, यह बता देने भर से चिकित्सा शास्त्र का कार्य खत्म नहीं होता, उस रोग का निदान भी ढूंढना पड़ता है। उसी प्रकार ज्योतिष द्वारा किसी का कष्ट या समस्या बता देना ही पर्याप्त नहीं है, उसका निवारण बताना भी एक ज्योतिषी का कर्तव्य है। अपने इसी कर्तव्य की पूर्ति करते हुए ज्योतिष उपायोें पर सम्पूर्ण चर्चा करने के लिए प्रस्तुत पुस्तक आपके हाथों में है।

जिस प्रकार हमारा ब्रहमाण्ड पंचमहाभूतों से बना है, उसी प्रकार हमारा षरीर भी पंचमहाभूतों से बना हैं शरीर में किसी तत्व की कमी या अधिकता होने से व्यक्ति रोगी हो सकता है। ‘उपाय विचार’ द्वारा उस तत्व की कमी या अधिकता को देखते हुए विभिन्न तरह के उपाय बताए जाते हैं। उपाय षब्द देखने व सुनने में जितना सरल, सौम्य व षीतलता प्रदान करने वाला है, उसका अर्थ उतना ही गंभीर चिंतन करने वाला है। उपाय षब्द में उ जल का प्रतीक है। इसके अन्तर्गत औधधि स्नान, गंगा स्नान व जल में वस्तुओं को बहाना जैसे उपाय आते हैं। प पवन (वायु) का प्रतीक है। इसके अन्तर्गत मंत्रोच्चार आता है। अ अग्नि का प्रतीक है। इसके अन्तग्रत हवन व व्रत आदि आते हैं। य (यजन) पृथ्वी का प्रतीक है। इसके अन्तर्ग्रत रत्न धारण व दान आदि कार्य आते हैं विचार अर्थात् चिंतन-गुरू का कार्य है। इसके द्वारा आकाष तत्व की कमी को पूरा किया जाता है।

प्रस्तुत पुस्तक में दिए गये तंत्र, मंत्र, यंत्र, रत्न, दान, हवन, स्नान, पूजा, व्रत, सेवा, रूद्राक्ष धारण व प्रवाहित आदि उपायों द्वारा आपका कल्याण हो, यही हमारी कामना है।

Size: 5.25″ x 8.5″ approx
ISBN: 81-7727-379-5